रविवार, 29 नवंबर 2009

मातृभाषा प्रेम

बोली प्रति सिनेह जओ देखबाक हो त अप्पन मैथिल खास क ओ मैथिल बंधुवर जे अपना के प्रवासी कहय छथि हुनका सभ स छोखगर उदाहरण तकनाई व्यर्थ अछि . अप्पन संघ ,समाज ,संगठन ,चेतना ,मंच ,मचान आ दलान जेना तेना तानि क कोनो  ने कोनो नवतुरिया वर्ग के बसिया चासनी में अद्धपक्कू कथा पेहानी सुना मैथिलि भाषा केर प्रति और मोअन घोर क दैत छथिन्ह और मंच सँ उतरि अंगरेजिया बोली में बाजि अप्पन औघोतनाइ प्रदर्शित करय छथि ( इ ब्लॉग पढ़निहार निशंक रहथु की जे लिखनिहार के कोनो  आ किनको प्रति भावनात्मक हिंसा करबाक भावना नहीं अछि ,एकरा केवल मात्र प्रतिक्रिया टा बुझी   )

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